भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अनकहे इतिहास के कुछ पहलू - भाग 6

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सुबह जब दिन निकल रहा था, तब ज़िले के वरिष्ठ पुलीस अफसर गाँव में आ पहुँचे। वैसी पूर्वसूचना स्थानीय पुलीस अफसरों ने मल्हारराव और गाँव के पाटील (गाँव के मुखिया) को दी ही थी। गाँव के पाटील थे धनाजी पाटील, जिनके पास वंशपरंपरा से चलनेवाला पाटीलपन का काम बड़ा भाई होने के कारण आया था, इसलिए उन्हें पाटील कहते थे, बस् इतना ही। धनाजी पाटील कोई भी काम नहीं करते थे। सभी सरकारी और ग़ैरसरकारी काम मल्हारराव ही देखते थे। क्योंकि धनाजी पाटील केवल निकम्मे ही नहीं थे, बल्कि महिलाओं के मामले में एक नंबर के लंपट थे और विभिन्न शौक रखनेवाले थे। पूरे गाँव को ही मल्हारराव पर भरोसा था। उन्होंने ने ही ज़ुबान दी थी, इस कारण पिछले चार-पाँच साल धनाजी पाटील हर एक दिन मौज-मस्ती में बिता रहे थे। मल्हारराव गाँव के कर (Tax) में होनेवाला पाटील का हिस्सा उसे सुव्यवस्थित रूप से लाकर देते थे और मुख्य रूप से धनाजी की गाँव में और गाँव के बाहर रहनेवाली हज़ारों एकड़ ज़मीन मल्हारराव ही सँभालते थे। केवल जब ब्रिटीश अफसर आते थे, तब धनाजी पाटील चावडी (गाँव की पंचायत का कार्यस्थल) में आकर बैठते थे। बोलने का काम मल्हारराव ही करते थे।

आज भी ब्रिटिश पुलीस अफसर आनेवाले थे, इस कारण धनाजी पाटील आकर बैठे थे। उन्हें कल घटित हुई घटना की जानकारी मल्हारराव ने संक्षेप में दी ही थी। मल्हारराव को पूरा यक़ीन था कि पुलीस अफसर और उसके खबरी भाई की हत्या हो जाने के कारण बिलकुल ठेंठ ऊपर तक समाचार रात में ही पहुँचेगा और शहर से एकाद तो गोरा (ब्रिटिश) अफसर अवश्य ही आयेगा और वैसा ही हुआ था। ब्रिटिश अफसर हेल्डेन सुबह सात बजे वहाँ आ पहुँचा था। यह हेल्डेन ज़िले का सर्वोच्च पुलीस अफसर था। वह बेहतरीन मराठी बोल सकता था।
‘देशभक्तों के लिए मृत्यु के समान क्रूर’ इस रूप में ही हेल्डेन विख्यात था। मुंबई-पुणे के साथ ही इसके अधिकार में रहनेवाली जेल में स्वतंत्रता-सेनानियों को और क्रांतिकारियों को रखा जाता था। ‘इसके अधिकार में रहनेवाली जेल यानी पृथ्वी पर रहनेवाला नरक’ इसी प्रकार का वर्णन उसके जेल की हवा खाकर आये हुए लोग करते थे। उसने आते ही छानबीन करना शुरू किया था। उसके कान बहुत तेज़ थे और मल्हारराव ने भी फकीरबाबा और फडके मास्टर की मदद से विठ्ठल मंदिर में चल रहे गजर और तालियों की आवाज़ दुगुनी ऊँची करवायी थी। उस आवाज़ से परेशान होकर हेल्डेन ‘क्या चल रहा है’ यह देखने के लिए ठेंठ उसी दिशा में निकला। उसके पीछे पीछे मल्हारराव, धनाजी पाटील ऐसे दोनों ही और हेल्डेन के चार खास भरोसेमंद भारतीय पुलीस अफसर जाने निकले।
रास्ते से जाते हुए मल्हारराव ने उस हत्या के बारे में और उस स्थान के बारे में सुव्यवस्थित रूप से हेल्डेन साहब को बता दिया था। इस कारण हेल्डेन साहब के मन में रहनेवाला शक और भी गहराता जायेगा, इस बात का मल्हारराव को पूरा यक़ीन था।
इसी के साथ मल्हारराव को यह भी पूरा विश्वास था कि यह ब्रिटिश अफसर ज़बरदस्ती करके मंदिर में प्रवेश नहीं करेगा; लेकिन कुत्तों की तरह उसके साथ वफ़ादार रहनेवाले वे चार भारतीय वंश के पुलीस अफसर उस पूरे स्थान का बिलकुल चप्पा चप्पा ढूँढ़नेवाले थे।

ये चारों पुलीस अफसर उस इलाके में बहुत मशहूर थे। साथ ही, गाँव में जिसकी हत्या हुई थी, वह पुलीस अफसर इस हेल्डेन का पाँचवाँ वफ़ादार कुत्ता ही था और इस कारण वे चारों भी झल्लाये हुए थे।
मंदिर के अहाते में पहुँचते ही हेल्डेन प्रांगण (बड़े आँगन) के बाहर ही बैठ गया और उसके आदेश के अनुसार ये चारों जन मंदिर और सभामंडप को बारीकी से देखकर छान-बीन करने लगे; लेकिन उनके लिए भी कुछ नियमों का अर्थात् मंदिर की पवित्रता भंग न करने के नियम का पालन करना अनिवार्य ही था। लेकिन ‘सभी नियमों का पालन करने के बाद भी कुछ मिल नहीं रहा है’ यह ध्यान में आ जाते ही वे चारों जन धार्मिक नियमों को दूर रखकर, कुछ जगह घुसकर बिलकुल हर एक कोने और अलमारी की छान-बीन करने लगे।
गुप्त दरवाज़े, गुप्त कमरे और तहखाना उन्हें मिलना संभव ही नहीं था। इसके दो कारण थे। एक तो फकीरबाबा ने यानी शिवरामराजन् ने रचनाएँ ही उस प्रकार से की थीं और दोनों मंदिरों के निर्माण में शामिल हुए तमिल मज़दूर कब के उनके अपने गाँव चले गये थे। दूसरी बात यह थी कि ऐसी जगहों और गुप्त दरवाज़ों के यहाँ भजन करने महिलाओं को ही बिठाया गया था। उनमें से कई महिलाएँ इन चारों की रिश्तेदार ही थीं, इनके गाँव की थीं अथवा उनकी जाति की थीं और ऐसी महिलाओं के बीच जाकर कार्रवाई करने पर उन चारों का उनकी जाति से और गाँव से बहिष्कार किया जा सकता था।
उन चारों ने बाहर आकर हेल्डेन से धीमी आवाज़ में अँग्रेज़ी में कहा कि, “बाकी सब कुछ व्यवस्थित लग रहा है, लेकिन तीन बातें खटक रही हैं। १) महिलाएँ एक तरफ, पुरुष एक तरफ इस तरह बैठने की परंपरा के होते हुए भी यहाँ के मंदिर में तो महिलाओं के समूह पुरुषों से अलग होने के बावजूद भी सभामंडप में जगह जगह बिखरे हुए थे।

२) मंदिर के सभामंडप के बाहर रहनेवाले प्रांगण (बड़ा आँगन) में एक नया बनाया हुआ मंडप है। जहाँ हत्या हुई, उसी स्थान पर शुद्धीकरण करने के लिए बड़ा यज्ञ चल रहा है। होमकुंड (जिसमें हवन किया जाता है वह कुंड) बहुत ही बड़े आकार का बनाया गया है और यहाँ काफी भीड़ है। मुख्य रूप से अठारह-पगड़ जातियों में से (उस समय के रिवाज के अनुसार अठारह मुख्य जातियाँ थीं और उनकी अपनी हर एक जाति की पगड़ी अथवा साफा अथवा फेटा यह केवल उनकी जाति के द्वारा ही पहना जाता था) हर एक जाति के प्रमुख नागरिक आसपास के गाँव से भी आ रहे हैं और यदि उन सभी को चोट पहुँचायी गयी, तो बहुत बड़ा असंतोष निर्माण हो सकता है। खटकने जैसी बात यह है कि एक भी जाति को मंडप के बाहर नहीं रखा गया है। यहाँ तक कि गाँव के बाहर जिस जाति की बस्ती है, उस जाति के लोगों को भी इस मंडप में स्थान है। इन लोगों को इतना सम्मान प्राप्त होने का क्या कारण है?
गाँव के कुलीन लोग यानी ब्राह्मण, क्षत्रिय और व्यापारी वर्ग इसका विरोध क्यों नहीं कर रहे हैं? इसका अर्थ साफ है कि कोई तो षड्यंत्र रचा जा रहा है।
३) कई चेहरे अपरिचित लग रहे हैं। इस परिसर के लगते ही नहीं हैं।
ऐसे सभी संदिग्धों को और सभी जातिप्रमुखों को पकड़कर पुलीस थाने में उनसे पूछताछ करने ले जायें क्या? हंटर की चार-पाँच फटकार लगने पर कोई ना कोई तो अवश्य ही बोलने लगेगा।”

हेल्डेन ने अपनी बेचैनी छुपाते हुए अँग्रेज़ी में ही कहा, “ऐसा कुछ करने के लिए ऊपर से (वरिष्ठों द्वारा) सख़्त मनाही की गयी है; क्योंकि सभी भारतीयों को, दर असल सभी जातिप्रमुखों और गाँवप्रमुखों को उस ‘रानी के घोषणापत्र’ (क्वीन्स् प्रोक्लमेशन) के बारे में गहराई से जानकारी देशभर के सरकारविरोधी सुशिक्षितों के द्वारा दी गयी है। इस कारण मुझे ऊपर से (वरिष्ठों से) अनुमति प्राप्त करनी होगी; क्योंकि ‘जालियनवाला बाग’ की घटना के बाद ब्रिटिश पार्लमेंट कुछ मामलों में संयम बरत रही है और वैसा ही संयम बरतने का आदेश हम सभी को दिया गया है। ऐसे में ‘सन २८ की दांडी यात्रा में कई भारतीयों के सिर फूटे’ इस घटना का भी वर्णन और छायाचित्र दुनिया भर के समाचारपत्रों ने छापे हैं। इस कारण थोड़ा सब्र करते हैं।”
हेल्डेन उसका लावलष्कर लेकर ज़िले के प्रमुख स्थान पर चला गया। उनमें से किसी को भी अंदाज़ा नहीं था कि मल्हारराव, फकीरबाबा और फडके मास्टर अँग्रेज़ी उत्कृष्ट रूप से जानते थे और बोल भी सकते थे। उन्होंने केवल जानकीबाई को उनसे दूर खड़ा कर रखा था और वह भी उसके (जानकीबाई के) सम्मान को कायम रखते हुए; क्योंकि उसके पति के यानी रामचंद्र धारपुरकर के ओहदे का ब्रिटिश सरकार में रहनेवाला प्रभाव हेल्डेन को अच्छी तरह पता था।
उन सभी के चले जाते ही मल्हारराव हर एक जाति के और गाँव के उनके प्रमुख हस्तकों को लेकर बिलकुल शांति से विठ्ठल मंदिर में रहनेवाले एक गुप्त कमरे में गये। हेल्डेन और उसके अफसरों में हुई सारी बातचीत मल्हारराव ने सभी को अच्छे से समझायी।
कुछ लोगों ने विनम्रता से प्रश्न पूछा, “रानी का घोषणापत्र यानी निश्चित रूप से क्या? जालियनवाला बाग कहाँ है और वहाँ क्या हुआ? दांडी यात्रा में सब कुछ शांति से चल रहा होने के बावजूद भी लोगों के सिर फूटे कैसे?”
मल्हारराव ने शांति से आँखें बंद करके स्वयंभगवान का मंत्रगजर किया और एक-एक बात बताना शुरू किया।
(कथा जारी है)
