भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अनकहे इतिहास के कुछ पहलू - भाग 13
झाँसी के युद्ध का निर्णायक मोड़, झलकारीबाई का अद्वितीय बलिदान, रानी लक्ष्मीबाई की रक्षा हेतु अपनाई गई रणनिति और ब्रिटिशों के विरुद्ध साहस की अमर गाथा।

झाँसी के युद्ध का निर्णायक मोड़, झलकारीबाई का अद्वितीय बलिदान, रानी लक्ष्मीबाई की रक्षा हेतु अपनाई गई रणनिति और ब्रिटिशों के विरुद्ध साहस की अमर गाथा।

झाशीच्या युद्धातील निर्णायक क्षण, झलकारीबाईचे अद्वितीय बलिदान, राणी लक्ष्मीबाईला सुरक्षित मार्ग देण्यासाठी केलेली रणनिती आणि ब्रिटिशांविरुद्धची शौर्यगाथा – कथामंजिरी ४

Rani Lakshmibai’s fearless leadership, strategic resistance against British forces, nationwide secret support, and her historic resolve ‘I will not surrender Jhansi’ ignite the spirit of India’s freedom struggle.

रानी लक्ष्मीबाई का अदम्य साहस, गुरिल्ला युद्धनीति से ब्रिटिशों को दिया गया प्रतिकार, देशभर से मिला गुप्त समर्थन और ‘मेरी झाँसी नहीं दूँगी’ की घोषणा से प्रज्वलित स्वतंत्रता संग्राम।

राणी लक्ष्मीबाईचे धैर्य, गनिमी काव्याने ब्रिटिश सैन्याला दिलेला प्रतिकार, देशभरातील सहकाऱ्यांचा गुप्त पाठिंबा आणि ‘मेरी झाँसी नहीं दूँगी’ या घोषणेने पेटलेला स्वातंत्र्यसंग्राम

राणी लक्ष्मीबाईचे धैर्य, गनिमी काव्याने ब्रिटिश सैन्याला दिलेला प्रतिकार, देशभरातील सहकाऱ्यांचा गुप्त पाठिंबा आणि ‘मेरी झाँसी नहीं दूँगी’ या घोषणेने पेटलेला स्वातंत्र्यसंग्राम