भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अनकहे इतिहास के कुछ पहलू - भाग 16
रानी लक्ष्मीबाई के बलिदान के बाद उनके निष्ठावान साथियों ने गुप्त रूप से अंतिम संस्कार कर गद्दारों से बदला लेने की शपथ ली।

रानी लक्ष्मीबाई के बलिदान के बाद उनके निष्ठावान साथियों ने गुप्त रूप से अंतिम संस्कार कर गद्दारों से बदला लेने की शपथ ली।

ग्वालियर के भीषण युद्ध, ब्रिटिश षड्यंत्र, मोरोपंत तांबे का भावुक बलिदान और 18 जून 1858 को रानी लक्ष्मीबाई की अमर वीरगाथा |

झलकारीबाई के अद्भुत साहस और रणनीति ने रानी लक्ष्मीबाई को कालपी और ग्वालियर तक सुरक्षित पहुँचने में कैसे सहायता की, जनरल ह्यूज रोज की सेना को कैसे भ्रमित किया गया, और 1857 के स्वाधीनता संग्राम की रोमांचक व हृदयस्पर्शी घटनाओं का विस्तृत वर्णन।

झाँसी के युद्ध का निर्णायक मोड़, झलकारीबाई का अद्वितीय बलिदान, रानी लक्ष्मीबाई की रक्षा हेतु अपनाई गई रणनिति और ब्रिटिशों के विरुद्ध साहस की अमर गाथा।

रानी लक्ष्मीबाई का अदम्य साहस, गुरिल्ला युद्धनीति से ब्रिटिशों को दिया गया प्रतिकार, देशभर से मिला गुप्त समर्थन और ‘मेरी झाँसी नहीं दूँगी’ की घोषणा से प्रज्वलित स्वतंत्रता संग्राम।

रानी लक्ष्मीबाई की गुप्त तैयारी, ब्रिटिशों के विरुद्ध उनकी रणनीति और झांसी की रक्षा के लिए लड़ी गई शौर्यपूर्ण युद्ध की प्रेरणादायी कथा।