भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अनकहे इतिहास के कुछ पहलू - भाग 31
लोकमान्य तिलक के निधन के बाद उमड़े जनसैलाब ने ब्रिटिश सत्ता को भी हिला दिया। उनकी अंतिम यात्रा ने भारतीय एकता, स्वराज्य की भावना और राष्ट्रप्रेम का अद्वितीय दृश्य प्रस्तुत किया।

लोकमान्य तिलक के निधन के बाद उमड़े जनसैलाब ने ब्रिटिश सत्ता को भी हिला दिया। उनकी अंतिम यात्रा ने भारतीय एकता, स्वराज्य की भावना और राष्ट्रप्रेम का अद्वितीय दृश्य प्रस्तुत किया।

लोकमान्य तिलक ने स्वराज्य के लिए जनता में जागरूकता पैदा की और कठोर अत्याचार सहते हुए भी स्वतंत्रता आंदोलन को नई शक्ति दी।

ब्रिटिश अत्याचारों से क्रोधित खुदीराम बोस और प्रफुल्ल चाकी ने क्रांतिकारी मार्ग से प्रतिरोध करने का निर्णय लिया।

तिलक के नेतृत्व में स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलनों ने पूरे देश में जागरूकता फैलाई और ब्रिटिश विरोध तेज हुआ।

रैंड और आयर्स्ट की हत्या के बाद ब्रिटिश अत्याचारों के खिलाफ जनता का आक्रोश बढ़ा और चाफेकर बंधुओं के बलिदान ने क्रांति को नई दिशा दी।
लोकमान्य तिलक ने गणेशोत्सव और शिवाजी जयंती के माध्यम से जनजागरण कर अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन खड़ा किया।