भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अनकहे इतिहास के कुछ पहलू - भाग 29
ब्रिटिश अत्याचारों से क्रोधित खुदीराम बोस और प्रफुल्ल चाकी ने क्रांतिकारी मार्ग से प्रतिरोध करने का निर्णय लिया।

ब्रिटिश अत्याचारों से क्रोधित खुदीराम बोस और प्रफुल्ल चाकी ने क्रांतिकारी मार्ग से प्रतिरोध करने का निर्णय लिया।

तिलक के नेतृत्व में स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलनों ने पूरे देश में जागरूकता फैलाई और ब्रिटिश विरोध तेज हुआ।

रैंड और आयर्स्ट की हत्या के बाद ब्रिटिश अत्याचारों के खिलाफ जनता का आक्रोश बढ़ा और चाफेकर बंधुओं के बलिदान ने क्रांति को नई दिशा दी।
लोकमान्य तिलक ने गणेशोत्सव और शिवाजी जयंती के माध्यम से जनजागरण कर अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन खड़ा किया।

‘केसरी’ और ‘मराठा’ के माध्यम से तिलक ने ब्रिटिश अत्याचारों का विरोध कर देशभर में जागृति फैलाई।

रानी के घोषणापत्र के बाद भारत की राजनीति, समाज और मानसिकता में आए परिवर्तनों का गहन विश्लेषण।