श्रीपुरुषार्थ अनिरुद्ध धाम येथे वापरण्यात येणार्या "नवगुणी कुंकवासंदर्भात" माहिती

परमपूज्य सद्गुरु श्रीअनिरुद्धांच्या संकल्पानुसार वैशाख पौर्णिमेच्या शुभ मुहूर्तावर, म्हणजेच १ मे २०२६ रोजी श्रीपुरुषार्थ अनिरुद्ध धाम येथील श्री परांबा परमेश्वरीच्या गर्भगृहाचे द्वार उघडण्याचा मंगलमय सोहळा अत्यंत हर्षोल्हासात पार पडला. ह्याच शुभ मुहूर्तावर गर्भगृहातील श्री परांबा परमेश्वरीसहित इतर सर्व देवतांचे विधीवत पूजनही सुरू झाले. दिवसभरातील ह्या सर्व पूजनांमधील उपचारांमध्ये "नवगुणी कुंकू" हे विशेष प्रकारचे कुंकू वापरण्यात येत आहे ज्याचा उल्लेख सद्गुरु श्रीअनिरुद्धांनी गुरुवार, दि. २३ एप्रिल २०२६ रोजीच्या त्यांच्या पितृवचनामध्येही केला होता.
ह्या नवगुणी कुंकवामध्ये खाली दिल्याप्रमाणे एकूण नऊ घटक आहेत, ज्यांना एका विशिष्ट प्रमाणात एकत्र करून नवगुणी कुंकू तयार केले जाते.
(१) कुंकू (नैसर्गिक पद्धतीने बनविलेले)
(२) हळद
(३) अष्टगंध
(४) चंदन पावडर
(५) दवणा पावडर
(६) केशर
(७) शेंदूर
(८) वाळा पावडर
(९) नागरमोथा पावडर
हे पूजनामध्ये अर्पण झालेले पवित्र नवगुणी कुंकू श्रीपुरुषार्थ अनिरुद्ध धामाच्या प्रसाद काउंटरवर प्रसादस्वरूपात घरी घेऊन जाण्यासाठी श्रद्धावानांकरिता उपलब्ध असून हे कुंकू खाली दिलेल्या प्रसंगी श्रद्धावान वापरू शकतात.
- स्त्रिया स्वत:ला व एकमेकींना लावण्यासाठी हे कुंकू वापरू शकतात.
- एखाद्या मंगलकार्यामध्ये घरात हाताचे ठसे किंवा "ॐ" किंवा "स्वस्तिक" काढण्यासाठी हे कुंकू वापरू शकतो.
- अंबज्ञ इष्टिका बनविताना त्याचे लेपन करतेवेळी गेरूमध्ये हे कुंकू मिसळून वापरू शकतो.
- नवीन घेतलेल्या जमिनीत अर्पण करण्यासाठी हे कुंकू वापरू शकतो.
हे प्रसादस्वरूपातील कुंकू खाली दिलेल्या प्रसंगी कृपया वापरू नये.
- घरी पूजनासाठी (देवाला/देवीला अर्पण करण्यासाठी) हे कुंकू वापरू नये.
- देवाची/देवीची पाऊले काढण्यासाठी हे कुंकू कधीही वापरू नये.
अशा ह्या "नवगुणी कुंकवाचे" अनन्यसाधारण महत्व असून सद्गुरु श्रीअनिरुद्धांच्या कृपेने ह्या पवित्र कुंकवाचा प्रसादस्वरूपात लाभ घेण्याची संधी आपल्याला प्राप्त झालेली आहे.
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श्रीपुरुषार्थ अनिरुद्ध धाम में इस्तेमाल होनेवाले "नवगुणी कुंकुम" के संदर्भ में जानकारी
परमपूज्य सद्गुरु श्रीअनिरुद्धजी के संकल्पानुसार वैशाख पूर्णिमा के शुभ मुहूर्त पर, यानी १ मई २०२६ के दिन श्रीपुरुषार्थ अनिरुद्ध धाम में श्री परांबा परमेश्वरी के गर्भगृह के पट खुलने का मंगलमयी समारोह बहुत ही हर्षोल्हास के साथ संपन्न हुआ। इसी शुभ मुहूर्त पर गर्भगृह में श्री परांबा परमेश्वरी सहित अन्य सभी देवताओं का विधिवत पूजन भी शुरू हुआ। दिनभर के सभी पूजनों के उपचारों में "नवगुणी कुंकुम" इस विशेष प्रकार के कुंकुम का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसका उल्लेख सद्गुरु श्रीअनिरुद्धजी ने गुरुवार, दि. २३ अप्रैल २०२६ के अपने पितृवचन में भी किया था।
इस नवगुणी कुंकुम में नीचे दियेनुसार कुल नौं घटक हैं, जिन्हे एक विशिष्ट मात्रा में एकत्रित करके नवगुणी कुंकुम तैयार किया जाता है।
(१) कुंकुम (नैसर्गिक पद्धति से बनाया गया)
(२) हल्दी
(३) अष्टगंध
(४) चंदन पाउडर
(५) दवना पाउडर
(६) केसर
(७) सिंदूर
(८) खस पाउडर
(९) नागरमोथा पाउडर
पूजन में अर्पण किया हुआ पवित्र नवगुणी कुंकुम, श्रीपुरुषार्थ अनिरुद्ध धाम के प्रसाद काउंटर पर प्रसाद के रूप में घर ले जाने हेतु श्रद्धावानों के लिए उपलब्ध होकर, इस कुंकुम का उपयोग आगे बताये स्थानों पर कर सकते हैं
* स्त्रियाँ स्वयं को तथा एक--दूसरी के माथे पर लगाने के लिए इस कुंकुम का उपयोग कर सकती हैं।
* किसी मंगलकार्य के उपलक्ष्य में घर में हाथ की मुद्राएँ अथवा "ॐ" या "स्वस्तिक" अंकित करने के लिए इस कुंकुम का उपयोग कर सकते हैं।
* अंबज्ञ इष्टिका बनाते समय उसके लेपन के दौरान गेरू में यह कुंकुम मिलाकर इस्तेमाल कर सकते हैं।
* नयी ख़रीदी ज़मीन में अर्पण करने के लिए इस कुंकुम का इस्तेमाल कर सकते हैं।
प्रसादस्वरूप होनेवाले इस कुंकुम का नीचे बताये हुए समयों पर कृपया इस्तेमाल ना करें।
* घर में पूजन के लिए (भगवान को/देवी को अर्पण करने के लिए) इस कुंकुम का इस्तेमाल ना करें।
* भगवान के/देवी के चरणचिह्न बनाने के लिए इस कुंकुम का इस्तेमाल ना करें।
ऐसे इस "नवगुणी कुंकुम" का महत्त्व अनन्यसाधारण होकर, सद्गुरु श्रीअनिरुद्धजी की कृपा से, इस पवित्र कुंकुम का, प्रसाद के रूप में लाभ उठाने का अवसर हमें प्राप्त हुआ है।
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Information regarding the "Navguni Kumkum" being used at Shree Purushartha Aniruddha Dham
As per the Sankalp of Param Pujya Sadguru Shree Aniruddha, on the auspicious occasion of Vaishakh Pournima, i.e., 1st May 2026, the sacred ceremony of opening the doors of the Garbhagriha (sanctum sanctorum) of Shree Paramba Parmeshwari at Shree Purushartha Aniruddha Dham was completed with great joy and enthusiasm.
On this very auspicious occasion, the ritualistic worship (Poojan) of Shree Paramba Parmeshwari, along with all the other deities within the Garbhagriha, also commenced.
During the various poojan rituals conducted throughout the day, a special form of kumkum known as ‘Navaguni Kumkum’ is being used. This sacred kumkum was also mentioned by Sadguru Shree Aniruddha in his Pitravachan dated Thursday, 23rd April 2026.
This Navaguni Kumkum is prepared by combining the following nine ingredients in specific proportions:
1. Kumkum (prepared through natural methods)
2. Turmeric
3. Ashtagandha
4. Sandalwood powder
5. Davanaa powder
6. Saffron
7. Shendur
8. Vaalaa powder
9. Naagarmothaa powder
This sacred Navaguni Kumkum, offered during worship, is available to devotees as Prasad at the Prasad Counter of Shree Purushartha Aniruddha Dham for taking home.
Devotees may use this kumkum on the following occasions:
* Women may apply it to themselves or to one another.
* It may be used during auspicious functions at home to create hand impressions or sacred symbols such as ‘Om’ or ‘Swastik’.
* While preparing Ambadnya Ishtika, it may be mixed with geru and used for coating.
* It may be offered to a newly acquired land.
This Kumkum, a Prasad, should not be used for the following purposes:
* It should not be used for offering to any deity during the poojan performed at home.
* It should never be used to draw the footprints of any deity.
Such is the unique significance of this Navaguni Kumkum, and by the grace of Sadguru Shree Aniruddha, we have been blessed with the opportunity to receive it in the form of Prasad.
