अक्षय्यतृतीयेस अतिरिक्त मूर्ती किंवा तसबिरींचे विधियुक्त विसर्जन करण्याबाबत सूचना

घरामध्ये एकाच देवाच्या अतिरिक्त मूर्ती वा तसबिरी असल्यास, अक्षय्यतृतीयेस त्यांचे विधीयुक्त विसर्जन कसे करावे, यासंबंधीची माहिती सद्गुरु श्री अनिरुद्ध बापूंनी त्यांच्या एका प्रवचनातून दिलेलीच आहे. श्रद्धावानांच्या सोयीकरिता त्या प्रवचनाची लिंक खाली देत आहोत.
https://youtu.be/hREc-qQXY0M?si=dTwyR4LTaUjbADBW
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https://www.instagram.com/reel/DJBpnePvLCh/?l=1
त्याचप्रमाणे, या मूर्ती वा तसबिरी इत्यादींचे विसर्जन अक्षय्यतृतीयेस वाहत्या जलात करणे शक्य नसल्यास काय करावे, यासंबंधी श्रद्धावानांकडून विचारणा झाली होती. सद्गुरु बापूंनी या संदर्भात केलेला खुलासा खाली दिला आहे.
वाहत्या जलात विसर्जन करणे शक्य नसल्यास, त्यांचे विसर्जन समुद्रात करावे. दुसरा पर्याय म्हणून, ज्या विभागांमध्ये विसर्जनासाठी जलकुंडांची सोय केलेली असेल, तिथे या प्रतिमांना केळीच्या पानांत गुंडाळून त्यांचे विसर्जन करावे.
काही कारणास्तव अक्षय्यतृतीयेस विसर्जन करणे शक्य न झाल्यास, अशा प्रतिमांना त्या दिवशी अक्षता वाहून त्यांना केळीच्या पानांत व्यवस्थित गुंडाळून ठेवावे आणि अमावास्या सोडून अन्य कोणत्याही दिवशी त्यांचे विसर्जन करावे.
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अक्षय्यतृतीया के दिन अतिरिक्त मूर्तियों या तसवीरों का विधिवत् विसर्जन करने के संदर्भ में सूचना
घर में अगर एक ही देवता की अतिरिक्त मूर्तियाँ या तस्वीरें हों, तो अक्षय्यतृतीया के दिन उनका विधिवत् विसर्जन कैसे करें, इस संदर्भ में जानकारी सद्गुरु श्री अनिरुद्ध बापूजी ने उनके एक प्रवचन में दी ही है। श्रद्धावानों की सुविधा के लिए उस प्रवचन की लिंक नीचे दे रहे हैं।
https://youtu.be/hREc-qQXY0M?si=dTwyR4LTaUjbADBW
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https://www.instagram.com/reel/DJBpnePvLCh/?l=1
उसी प्रकार, ये मूर्तियाँ अथवा तस्वीरें आदि का विसर्जन अक्षय्यतृतीया के दिन बहते जल में करना संभव ना हो, तो क्या करें, इस मामले में श्रद्धावानों द्वारा प्रश्न पूछे गये थे। सद्गुरु बापूजी ने इस संदर्भ में किया हुआ खुलासा आगे दिया गया है।
बहते जल में विसर्जन करना संभव ना हो, तो उनका विसर्जन समुद्र में करें। अन्य विकल्प यह है कि जिन विभागों में विसर्जन के लिए जलकुंड का प्रबंध किया गया है, वहाँ इन प्रतिमाओं को केले के पत्तों में चारों ओर से लपेटकर उनका विसर्जन करें।
किसी कारणवश अक्षय्यतृतीया के दिन विसर्जन करना संभव ना हों, तो ऐसी प्रतिमाओं को उस दिन अक्षता अर्पण करके उन्हें केले के पत्तों में चारों ओर से ठीक से लपेटकर रखें और अमावस को छोड़कर अन्य किसी भी दिन उनका विसर्जन करें।
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Guidelines for the Proper Immersion of Additional Idols or Photoframes on Akshaya Tritiya
Sadguru Shree Aniruddha Bapu has provided guidance, in one of his pravachans, on how to properly perform the visarjan of additional idols or photoframes of the same deity kept at home on the day of Akshaya Tritiya. For the convenience of Shraddhavans, the link to that pravachan is provided below.
https://youtu.be/hREc-qQXY0M?si=dTwyR4LTaUjbADBW
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https://www.instagram.com/reel/DJBpnePvLCh/?l=1
Also, Shraddhavans had raised queries regarding what should be done if it is not possible to immerse such idols or pictures in flowing water on the day of Akshaya Tritiya. Sadguru Bapu has clarified this matter as follows:
If immersion in flowing water is not feasible, the idols may be immersed in the sea. Alternatively, in areas where designated water tanks (jal-kund) have been arranged for immersion, the idols should be properly wrapped on all sides with banana leaves and then respectfully immersed there.
If, for any reason, it is not possible to perform the immersion on the day of Akshaya Tritiya, then on that day, offer akshata to the idols or pictures, carefully wrap them on all sides with banana leaves, and keep them aside. Thereafter, the immersion may be performed on any other suitable day, except on Amavasya.
