Lyrics of Saavla Sundar Sundar Roop Ka from album Pipasa 1 Hindi

साँवला सुन्दर सुन्दर रूप का
साँवला सुन्दर सुन्दर रूप का
भला तगडा मर्द मराठा शिल्प सुन्दरता का
वज्रविदारक रण में धुरंधर, पर फिर भी यह मृदु धराधर
शासन करे फिर भी अभयंकर, सारथी कैवल्य का
यह मुसकाये अन्तर झूमे, नजर मिले दिल घायल कर दे
चरण देहुडा उसपे बिठाये, पालक प्रेमी जनों का
घनी मूंछ में मुसकुराके मन को पागल करके लुभाये
कृपाकरों से पाप मिटाकर रक्षक भक्तजनों का
वदन मनोरम राजीव लोचन, छलकाते हैं ज्ञान ये नयन
करते ही भक्ति पार कराये भंजक प्रारब्ध का
पिपा बदल गया चित्र बदला आजानुबाहू विराट देखा
सामीप्य का द्वार खुल गया राजा कारुण्य का