Lyrics of Mann Ki Ye Vrutti from album Pipasa 1 Hindi

मन की ये वृत्ति, बापु की पनाह ले
मन की ये वृत्ति, बापु की पनाह ले,
रहे बापुचरणों में, नित्य सदा ॥१॥
प्रारब्ध लंगड़ा, ज्ञान भी बहरा,
कारण अंधा, ना रहें अब ये ॥२॥
अनिरुद्ध मेरे, कृपा तुम करो अब ,
प्रेम की ये धारा अब बहने दो ॥३॥
सदा घोष नाम का, खुशी से भरें हम,
झूमेंगे सन्तोष से, चरणों में तेरे ॥४॥
चरणसेवा की जो, निष्ठावान् भाव से,
पिपा भाग्यशाली, हुआ संसार में ॥५॥