Lyrics of Bapu Aniruddha Hari from album Pipasa 1 Hindi

बापु अनिरुद्ध हरि
बापु अनिरुद्ध हरि, गरजत पिपा की वैखरी
पिपा भक्तों का मुखिया, उसने धर लिया विठ्ठल
डोर बाँधके प्रेम की, भेंट कराये विठ्ठल की
पिपा पकड़े चरणयुगुल, कहे, भक्तों रखिए माथा
शुद्ध पिपा अंतरंग, उसके बोल ही अभंग
योगीन्द्र का मिट गया ताप, गाते पिपा का प्रताप