Lyrics of Aniruddha Ko Mere from album Pipasa 2 Hindi

अनिरुद्ध को मेरे
अनिरुद्ध को मेरे, कितनी मुझसे है ममता
कोई ना सराहे इस सा, इसका धर्म अनोखा
चाहूँ चीरके ये छाती बसाऊँ इसे मैं दिल में
स्पर्श हुआ जो छुरी का, दर्द उठा इसके दिल में
पेड़ छाँव देता रहता, जल सींचें जड़ों में
जल-छाँव का ये रिश्ता, आज समझ पाऊँ मैं
इसके अपरंपार गुणों का, बखान कैसे करूँ मैं
ऐसा कभी कहना नहीं, यही देता सब कुछ हमें
पिपा कहे मेरे वन में, इसने खिलायी है बगिया
इसकी बाग़ इसे लौटाके, चखे मधुर फल ये पिपा